हमारा समाज आज बच्चों के विवाह को लेकर इतना सजग हो गया हे कि आपस मे रिश्ते ही नहीं हो पा रहे हें आप इस से शायद अच्छे से समझ पायें। "आज 27-28-32 उम्र तक की समाज मे बहुत सी कुँवारी लडकियाँ घर बैठी है क्योंकि इनके सपने हैसियत से भी बहुत ज्यादा है इस प्रकार के कई उदाहरण है। ऐसे लोगो के कारण समाज की छवि बहुत खराब हो रही है। सबसे बडा मानव सुख, सुखी वैवाहिक जीवन होता है। पैसा भी आवश्यक है लेकिन कुछ हद तक। पैसे की वजह से अच्छे रिश्ते ठुकराना गलत है। पहली प्राथमिकता सुखी संसार व अच्छा घर-परिवार होना चाहिये। ज्यादा धन के चक्कर मे अच्छे रिश्तों को नजर-अंदाज करना गलत है। संपति खरीदी जा सकती है लेकिन गुण नही।" मेरा मानना है कि घर-परिवार और लडका अच्छा देखें लेकिन ज्यादा के चक्कर मे अच्छे रिश्ते हाथ से नही जाने दें। सुखी वैवाहिक जीवन जियें। 30 की उम्र के बाद विवाह नही होता समझौता होता है और अगर मेडिकल स्थिति से भी देखा जाए तो उसमें बहुत सी समस्याएँ उत्पन्न होती है। "आज उससे भी बुरी स्थिति कुंडली मिलान के कारण हो गई हैं।" आप सोचिए जिनके साथ ...
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